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नेपाल व पश्चिम बंगाल से आये सैकड़ों भक्त ,किये कामवन की लीलास्थलियों क़े दर्शन,विमल बिहारी सहित विमल कुंड के दर्शन को उमड़ा भक्तों का सैलाब

नेपाल व पश्चिम बंगाल से आये सैकड़ों भक्त ,किये कामवन की लीलास्थलियों क़े दर्शन,विमल बिहारी सहित विमल कुंड के दर्शन को उमड़ा भक्तों का सैलाब हिमांशु मोदी कामवन -ब्रज चौरासी कोस व ब्रज वृन्दावन दर्शन को बालकृष्ण शरण उपाध्याय क़े सानिध्य में आये नेपाल व पश्चिम बंगाल क़े सैकड़ों भक्तों ने तीर्थराज विमलकुण्ड विराजित विमलबिहारी मन्दिर क़े दर्शन कर परिक्रमा ,आचमन व पूजन किया। कामवन माहात्म्य सुनाते हुए मन्दिर विमल बिहारी क़े सेवाअधिकारी संजय लवानिया ने बताया कि भगवान कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ द्वारा भी ब्रज यात्रा की गयी थी। समस्त ब्रज मण्डल को रसिक संतजनों ने बैकुण्ठ से भी सर्वोपरि माना है। इससे ऊपर और कोई भी धाम नहीं है जहाँ प्रभु ने अवतार लेकर अपनी दिव्य लीलायें की हों। इस ब्रज भूमि में नित्य लीला शेखर श्रीकृष्णजी की बांसुरी के ही स्वर सुनाई देते हैं अन्य कोलाहल नहीं। यहाँ तो नेत्र और श्रवणेन्द्रियाँ प्रभु की दिव्य लीलाओं का दर्शन और श्रवण करते हैं। यहाँ के रमणीय वातावरण में पक्षियों का चहकना, वायु से लताओं का हिलना, मोर बंदरों का वृक्षों पर कूदना, यमुना के प्रवाहित होने का कलरव, समस्त ब्रज गोपिकाओं का यमुना से अपनी- अपनी मटकी में जल भर कर लाना और उनकी पैंजनियों की रुनझुन, गोपिकाओं का आपस में हास-परिहास, ग्वालवालों का अपने श्याम सुन्दर के साथ नित्य नयी खेल-लीलाओं को करना, सभी बाल सखाओं से घिरे श्री कृष्ण का बड़ी चपलता से गोपियों का मार्ग रोकना और उनसे दधि का दान माँगना। यमुना किनारे कदम्ब वृक्ष के ऊपर बैठकर बंशी बजाना और बंशी की ध्वनि सुनकर सभी गोपिकाओं का यमुना तट पर दौड़कर आना और लीला करना यही सब नन्द नन्दन की नित्य लीलाएं इस ब्रज में हुई हैं। यहाँ की सभी कुँज-निकुँज बहुत ही भाग्यशाली हैं क्योंकि कहीं प्यारे श्याम सुन्दर का किसी लता में पीताम्बर उलझा तो कहीं किसी निकुँज में श्यामाजू का आँचल उलझा। प्रभु श्री श्याम सुन्दर की सभी निकुँज लीलायें सभी भक्तों, रसिकजनों सन्तों को आनन्द प्रदान करती हैं। ब्रज दर्शनार्थियों ने कामवन विराजित तीर्थराज विमलकुण्ड ,विमल बिहारी जी सहित श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थलियों चरण पहाड़ी ,भोजन थाली ,खिसलनी शिला ,भामासुर की गुफा ,सेतुबन्ध रामेश्वर ,लंका-यशोदा,गया कुण्ड ,कामेश्वर महादेव ,पंचमुखी महादेव,पांच पांडव ,धर्मकुण्ड , वृन्दादेवी ,गोविन्ददेव जी ,गोपीनाथजी ,चौरासी खम्भा,गोकुल चन्द्रमा ज़ी ,मदनमोहन ज़ी आदि के दर्शन किये।

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