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*आइये जाने!जाएंट्स ग्रुप ऑफ़ कामवन के बारे में*

*आइये जाने!जाएंट्स ग्रुप ऑफ़ कामवन के बारे में* हिमांशु मोदी कामवन -14 अक्टूबर 2005 को *जायन्ट्स ग्रुप ऑफ कामवन* की स्थापना की गई। उसके बाद अनेकों संस्थाए कामां में गठित हुई जिनके नाम के पीछे कामवन लगाया गया। विभिन्न मन्दिरो पर पूर्व से ही कामवन नाम अंकित है। कई बार पंचकोसी परिक्रमा के चामड़ मंदिर पहुचने पर कामवन नाम की मांग पुरजोर तरीके से उठाई गई। विगत दो वर्ष से *कामां नही कामवन* अभियान के तहत विधायक से यह मांग कई कार्यक्रमों में रखी गयी। अस्पताल में जनाना वार्ड के उद्धघाटन पर भी यह कामवन की मांग रखी तो उन्होंने कहा कि विधानसभा में यह बात रखूंगी और दृढ़ता के साथ विधानसभा में कहा कि हमारी मूल पहचान हमे लौटा दो।हमारा नाम कामवन पुनः दे दो। विमल कुंड के प्रवेश द्वार पर आई लव कामवन का सेल्फी पॉइंट बनाया गया।पत्रों का सिलसिला चला,कालका मैया के दरबार,हरिओम स्मृति क्रिकेट प्रतियोगिता के दौरान सेल्फी स्टैंड लगा कर यह मांग आम जन ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर रखी।अनेको बार कई मौकों पर सबने यही मांग दोहराई तो अन्य संस्थाए,संघठन भी सक्रिय होने लगे। विगत 8 दिसम्बर से मुहिम बनाकर प्रतिदिन ज्ञापन विभिन्न संस्थाओं,संघठनो,सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं के साथ साथ विभिन्न समाजों ने मुख्यमंत्री के नाम उपखण्ड अधिकारी को सौपें गए।जिनका मीडिया कर्मियों ने व्यापक प्रचार प्रसार किया। इस दौरान विधायक जी की अध्यक्षता में नगर पालिका की अंतिम आम मीटिंग का आयोजन हुआ जिसमें सर्वसम्मति से कामवन नाम किये जाने का प्रस्ताव विधिवत लिया गया जिसका सभी ने एक स्वर से समर्थन किया। उधर पंचायत समिति ने भी प्रधान जी की अगुवाई में यह प्रस्ताव पास कर प्रशासन को अग्रिम कार्यवाही के लिए प्रेषित किया। इन दोनों प्रस्तावों ने नींव के पत्थर का काम किया और उधर विधायक जी की दृढ़ता ने इसको परवान चढ़ा दिया। समय समय पर पुनः स्मरण कराया गया तो उन्होंने कहा कि यह तो होगा और जरूर होगा।यही हुआ। हम सब यही कयास लगा रहे थे कि बजट सत्र में यह मांग पूरी हो सकती है क्योंकि स्वयं मुख्यमंत्री जी भी इस क्षेत्र व क्षेत्र के लोगो से भली भांति परिचित हैं।आखिरकार इतिहास को गढ़ दिया गया।

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