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जिला कलक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक संपन्न; सड़क सुरक्षा, पीएम सूर्यघर एवं जन-समस्याओं के निस्तारण पर दिए गए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
जिला कलक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक संपन्न; सड़क सुरक्षा, पीएम सूर्यघर एवं जन-समस्याओं के निस्तारण पर दिए गए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश डीग, 16 मार्च 2026। जिला कलक्टर उत्सव कौशल की अध्यक्षता में सोमवार को पंचायत समिति सभागार, डीग में जिला स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में मुख्य रूप से सड़क सुरक्षा, विभागीय समन्वय, फ्लैगशिप योजनाओं की प्रगति और जन-समस्याओं के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को लेकर व्यापक चर्चा की गई तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए। बैठक में सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिला कलक्टर ने निर्देश दिए कि राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम के अधिकारी सड़क सुरक्षा से संबंधित सभी आगामी बैठकों में अपनी उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें। दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग को निर्देशित किया गया कि वे ओवरलोडिंग, ओवरस्पीडिंग और असुरक्षित रूप से संचालित हो रहे वाहनों के विरुद्ध सघन जांच अभियान चलाकर नियमानुसार चालान की कार्यवाही सुनिश्चित करें। इसके अतिरिक्त, यातायात व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु धिलावटी से पहाड़ी वाले मार्ग पर संबंधित पुलिस चौकी इंचार्ज को अधिक सक्रियता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए। बैठक में वाहन चालकों की सुरक्षा के दृष्टिगत उनके नेत्र परीक्षण शिविरों के आयोजन पर भी विस्तार से चर्चा हुई, जिस पर चिकित्सा विभाग के अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि वाहन चालकों के लिए उक्त नेत्र परीक्षण कैंप पूर्व में ही सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है। विकास एवं जन-कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा के दौरान, जिला कलक्टर ने पीएम सूर्यघर योजना के अंतर्गत जिले की प्रगति पर चर्चा की और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे इस योजना के क्रियान्वयन में प्रदर्शन को और अधिक बेहतर करें, ताकि आमजन को इसका अधिकतम लाभ सुगमता से प्राप्त हो सके। सुशासन और जन-अभाव अभियोग निराकरण की दिशा में स्पष्ट निर्देश देते हुए जिला कलक्टर ने कहा कि राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज आमजन की शिकायतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रकरणों का केवल निस्तारण ही न किया जाए, अपितु यह सुनिश्चित किया जाए कि निस्तारण पूर्ण गुणवत्ता के साथ और शिकायतकर्ता की संतुष्टि के अनुरूप हो।



